चामुंडा माँ चालीसा लिरिक्स इन हिंदी। - KSHITIJSONGS

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Sunday, 6 September 2020

चामुंडा माँ चालीसा लिरिक्स इन हिंदी।

चामुंडा माता चालीसा


चामुंडा माँ चालीसा लिरिक्स इन हिंदी।



||दोहा||

नीलवरण मा कालिका रहती सदा प्रचंड ।

दस हाथो मई ससत्रा धार देती दुस्त को दांड्ड़ ।।

मधु केटभ संहार कर करी धर्म की जीत ।

मेरी भी बढ़ा हरो हो जो कर्म पुनीत ।।

||चौपाई||

नमस्कार चामुंडा माता । तीनो लोक मई मई विख्याता ।।

हिमाल्या मई पवितरा धाम है । महाशक्ति तुमको प्रडम है ।

मार्कंडिए ऋषि ने धीयया । कैसे प्रगती भेद बताया ।

सूभ निसुभ दो डेतिए बलसाली । तीनो लोक जो कर दिए खाली ।

वायु अग्नि याँ कुबेर संग । सूर्या चंद्रा वरुण हुए तंग ।

अपमानित चर्नो मई आए । गिरिराज हिमआलये को लाए ।

भद्रा-रॉंद्र्रा निट्टया धीयया । चेतन शक्ति करके बुलाया ।

क्रोधित होकर काली आई । जिसने अपनी लीला दिखाई ।

चंदड़ मूंदड़ ओर सुंभ पतए । कामुक वेरी लड़ने आए ।

पहले सुग्गृीव दूत को मारा । भगा चंदड़ भी मारा मारा ।

अरबो सैनिक लेकर आया । द्रहूँ लॉकंगन क्रोध दिखाया ।

जैसे ही दुस्त ललकारा । हा उ सबद्ड गुंजा के मारा ।

सेना ने मचाई भगदड़ । फादा सिंग ने आया जो बाद ।

हत्टिया करने चंदड़-मूंदड़ आए । मदिरा पीकेर के घुर्रई ।

चतुरंगी सेना संग लाए । उचे उचे सीविएर गिराई ।

तुमने क्रोधित रूप निकाला । प्रगती डाल गले मूंद माला ।

चर्म की सॅडी चीते वाली । हड्डी ढ़ाचा था बलसाली ।

विकराल मुखी आँखे दिखलाई । जिसे देख सृिस्टी घबराई ।

चंदड़ मूंदड़ ने चकरा चलाया । ले तलवार हू साबद गूंजाया ।

पपियो का कर दिया निस्तरा । चंदड़ मूंदड़ दोनो को मारा ।

हाथ मई मस्तक ले मुस्काई । पापी सेना फिर घबराई ।

सरस्वती मा तुम्हे पुकारा । पड़ा चामुंडा नाम तिहरा ।

चंदड़ मूंदड़ की मिरतट्यु सुनकर । कालक मौर्या आए रात पर ।

अरब खराब युध के पाठ पर । झोक दिए सब चामुंडा पर ।

उगर्र चंडिका प्रगती आकर । गीडदीयो की वाडी भरकर ।

काली ख़टवांग घुसो से मारा । ब्रह्माड्ड ने फेकि जल धारा ।

माहेश्वरी ने त्रिशूल चलाया । मा वेश्दवी कक्करा घुमाया ।

कार्तिके के शक्ति आई । नार्सिंघई दित्तियो पे छाई ।

चुन चुन सिंग सभी को खाया । हर दानव घायल घबराया ।

रक्टतबीज माया फेलाई । शक्ति उसने नई दिखाई ।

रक्त्त गिरा जब धरती उपर । नया डेतिए प्रगता था वही पर ।

चाँदी मा अब शूल घुमाया । मारा उसको लहू चूसाया ।

सूभ निसुभ अब डोडे आए । सततर सेना भरकर लाए ।

वाज्ररपात संग सूल चलाया । सभी देवता कुछ घबराई ।

ललकारा फिर घुसा मारा । ले त्रिसूल किया निस्तरा ।

सूभ निसुभ धरती पर सोए । डेतिए सभी देखकर रोए ।

कहमुंडा मा ध्ृम बचाया । अपना सूभ मंदिर बनवाया ।

सभी देवता आके मानते । हनुमत भेराव चवर दुलते ।

आसवीं चेट नवराततरे अओ । धवजा नारियल भेट चाड़ौ ।

वांडर नदी सनन करऔ । चामुंडा मा तुमको पियौ ।

||दोहा||

सरणागत को शक्ति दो हे जाग की आधार ।

‘ओम’ ये नेया दोलती कर दो भाव से पार ।

जय चामुंडा माँ






 

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